माँ अन्नपूर्णा — Maa Annapurna

रोज़ के मंत्र

माँ अन्नपूर्णा के मंत्र — अर्थ, उच्चारण और कब जपें

अन्न की देवी — हाथ में स्वर्ण पात्र और कलछी।

यहाँ माँ अन्नपूर्णा के वे मंत्र हैं जो घरों में रोज़ जपे जाते हैं। हर मंत्र के साथ आसान उच्चारण, सरल अर्थ और जपने का समय दिया गया है। किसी भी मंत्र पर बटन दबाइए — दिव्यमाला की डिजिटल माला गिनती संभाल लेगी, आप बस मन से नाम लीजिए।

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माँ अन्नपूर्णा के 2 रोज़ के मंत्र

भोजन से पहले का श्लोक

अन्नपूर्णे सदापूर्णे शङ्करप्राणवल्लभे।
ज्ञानवैराग्यसिद्ध्यर्थं भिक्षां देहि च पार्वति॥

अंग्रेज़ी में
Annapurne Sadapurne Shankara Prana Vallabhe, Jnana Vairagya Siddhyartham Bhiksham Dehi Cha Parvati
ऐसे बोलें
अन्न-पूर्णे · सदा-पूर्णे · शंकर-प्राण-वल्लभे · ज्ञान-वैराग्य · सिद्धि-अर्थम् · भिक्षाम् · देहि · च · पार्वति
कब जपें
भोजन से पहले, रसोई में खाना बनाते समय।
अर्थ
हे सदा भरपूर रहने वाली माँ अन्नपूर्णा, भगवान शंकर की प्रिय पार्वती — हमें ज्ञान और संतोष पाने के लिए अन्न का प्रसाद दें।
स्रोत
अन्नपूर्णा स्तोत्र (आदि शंकराचार्य)
“अन्नपूर्णे सदापूर्णे शङ्करप्राणवल्लभे” का जाप शुरू करें

जयकारा

जय माँ अन्नपूर्णा।

अंग्रेज़ी में
Jay Maa Annapurna
ऐसे बोलें
जय · माँ · अन्न-पूर्णा
कब जपें
भोजन परोसते समय।
अर्थ
अन्न देने वाली माँ अन्नपूर्णा की जय।
स्रोत
प्रचलित जयकारा
“जय माँ अन्नपूर्णा” का जाप शुरू करें

माँ अन्नपूर्णा का जाप कैसे करें

  1. शांत जगह चुनें। घर का मंदिर हो, कोई शांत कोना हो या यात्रा का पल — बस मन को कुछ क्षण ठहरने दें।
  2. मंत्र चुनें। “अन्नपूर्णे सदापूर्णे शङ्करप्राणवल्लभे” सबसे सरल शुरुआत है। अपने घर या गुरु की परंपरा का मंत्र हो, तो वही जपें।
  3. गिनती तय करें। 11, 21, 51 या 108 — जितना समय हो, उतना। संख्या से ज़्यादा ज़रूरी है श्रद्धा।
  4. हर नाम पर एक टैप। दिव्यमाला में बड़े बटन पर हर बार टैप करें। माला पूरी होते ही घंटी बजेगी।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

माँ अन्नपूर्णा का सबसे सरल मंत्र कौन-सा है?

“अन्नपूर्णे सदापूर्णे शङ्करप्राणवल्लभे” — हे सदा भरपूर रहने वाली माँ अन्नपूर्णा, भगवान शंकर की प्रिय पार्वती — हमें ज्ञान और संतोष पाने के लिए अन्न का प्रसाद दें। इसे भोजन से पहले, रसोई में खाना बनाते समय जपा जाता है।

माँ अन्नपूर्णा का मंत्र कितनी बार जपें?

108 मनकों की माला सबसे प्रचलित है, पर यह ज़रूरी नहीं। समय कम हो तो 11 या 21 बार भी श्रद्धा से जप सकते हैं। दिव्यमाला में 11, 21, 51, 108 या अपनी गिनती चुन सकते हैं।

क्या बिना माला के जाप कर सकते हैं?

हाँ। दिव्यमाला आपके फ़ोन को ही माला बना देती है — हर नाम पर एक टैप, और गिनती अपने आप। कोई अकाउंट या इंटरनेट ज़रूरी नहीं (पहली बार खोलने के बाद)।

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